ताइवानी तरबूज व पपीते की नर्सरी तैयार, पांच एकड़ में होगी खेती;

कजरैली। कजरैली केलापुर में खेती के आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आमदनी बढ़ाने के तरीके का प्रयोग लागातार जारी है। उन्नत खेती के लिए जिले में प्रसिद्ध किसान गुंजेश इस वर्ष भी ताइवानी तरबूज और पपीते के पौधे की नर्सरी तैयार कर चुके हैं। नर्सरी में तैयार तरबूज के चार हजार पौधे को लगाने के लिए खेत की तैयारी की जा रही है।

नेट विधि और सामान्य तरीके से खेती के लिए मशहूर किसान गुंजेश गुंजन ने बताया कि इस वर्ष ताइवान से तरबूज के बीज मंगाकर नर्सरी लगाई गई है। तरबूज के पौधे को लगाने से पैंतालीस दिन में फल आने लगता है। आने वाले मार्च महीने से फल तैयार हो जाएगा और शुरू में बाजार में अच्छी कीमत मिलनी की उम्मीद है। यहां स्ट्राबेरी से लेकर शिमला मिर्च और अन्य उन्नत किस्म के फसल लगाए जा रहे हैं। वहीं ताइवानी पपीता रेड लेडी 150 दिन में फल पककर टूटना शुरू हो जाएगा। पपीते की खेती से अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है।पांच वर्ष पहले से पपीते की खेती कर रहे हैं।

केलापुर कजरैली के किसान गुंजेश गुंजन ने बताया कि पुणे और केवीके सबौर व आत्मा भागलपुर से खेती में मास्टर ट्रेनर और केवीके से नर्सरी की तैयारी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रयोग के तौर पर पिछले वर्ष शिमला मिर्च की खेती की गई थी और प्रयोग सफल रहने के बाद इस वर्ष एक बीघे में (नेट शेड) मे शिमला मिर्च की खेती की गई है । फरवरी महीने में शुरुआती लगन मे शिमला मिर्च की कीमत भागलपुर मार्केट में चालीस से पचास रुपये किलो तक मिल जाती है। वहीं त्योहार के मौसम में तरबूज का ऊंचा दाम मिलता है। उन्होंने बताया कि शहर में सरकारी मंडी हाउस होना जरूरी है। बड़ी सरकारी मंडी होने से अन्य प्रदेश के व्यापारी का आना-जाना रहता है जिससे फसल की अच्छी कीमत मिलती है। लेकिन भागलपुर जैसे शहर में सरकारी मंडी नहीं है जिससे निजी मंडी के व्यापारी व बिचौलिया के एकाधिकार चलते अच्छी कीमत नहीं मिल पाती है।