डिजिटल युग में भागलपुर केंद्र का दायरा बढ़ा:ये आकाशवाणी का भागलपुर केंद्र है, लोग अब ऐप पर सुन रहे हैं कार्यक्रम;

बदलते दाैर में रेडियाे भी बदल रहा है। पहले आकाशवाणी भागलपुर से 17 जिलाें में प्रसारण हाेता था। लेकिन जब डिटिजल के दाैर में रेडिया का क्रेज कम हुआ ताे ऐप के माध्यम से इसका दायरा बढ़ाया गया। अब देश के कई राज्याें के अलावा खाड़ी देशाें में भागलपुर और बिहार के रह रहे लाेग भागलपुर आकाशवाणी का प्रसारण सुन रहे हैं। वहां से फाेन इन कार्यक्रम के तहत वहां के श्राेता फरमाइश करते हैं कि फलां गाना सुना दीजिए और फिर उनका पसंदीदा गाना बजाया जाता है।

पहले की अपेक्षा रेडियो सुनने वाले लोगों की तादाद घटी है, लेकिन इसके पुराने और पारंपरिक श्रोता इससे लगातार जुड़े हुए हैं। जबसे न्यूज ऑन एआईआर से प्रसारण शुरू हुआ है, तब से भागलपुर के कार्यक्रम जैसे फोन-इन आपकी पसंद में कतर और दुबई जैसे खाड़ी देशों के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा से श्रोता के फोन कॉल आते हैं। जब आकाशवाणी का प्रसारण मैनुअल तरीके से होता था तो सौ से अधिक कर्मचारी थे। लेकिन जब से यह डिजिटल शुरू हुआ है, 40 के करीब कर्मचारी ही कार्यरत हैं।

संस्कारों और संस्कृति से जोड़ता है रेडियो : बिरजू भाई

आकाशवाणी के वरीय उद्घोषक बिरजू भाई के नाम से प्रचलित विजय मिश्रा बताते हैं कि पहले की अपेक्षा श्रोताओं में कमी हुई है, लेकिन जो इसके वास्तविक श्रोता हैं, वे आज भी बने हुए हैं। रेडियो लोगों को अपनी संस्कृति और सभ्यता से जोड़ता है। एक ऐसा भी दौर था, जब वे खुद महीने के 15 दिन संथाल परगना जैसे क्षेत्र में जाकर लोगों का साक्षात्कार करते थे। उसका प्रसारण होता था। 1988 में आदमपुर में बना था नया स्टूडियो आकाशवाणी भागलपुर की सेवानिवृत कार्यक्रम उद्घोषिका का डॉ. मीरा झा बताती हैं कि आकाशवाणी की स्थापना 5 मार्च 1967 को हुई थी।

उस समय प्रसारण संध्याकालीन सभा में होता था। स्थानीय प्रस्तुति के नाम पर सभा आरंभ के साथ संध्या 5:30 बजे से वृंदगान और स्थानीय सूचनाओं को प्रसारण होता था। शेष कार्यक्रम 7:30 बजे के बाद पटना, रांची और दिल्ली से प्रसारित होता था। आपातकाल के समय सरकार की योजनाओं को प्रसारित करना जरूरी था। कम स्टाॅफ और अलीगंज में कम जगह होने के कारण समस्या होती थी। इसके बाद 1988 में आदमपुर में आकाशवाणी का अपना नया स्टूडियो तैयार किया गया। आज हर हाथ में स्मार्टफोन आ गया, जिससे हमारा रेडियो पीछे रह गया। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि वर्तमान समय में भी मोबाइल के माध्यम से भी हम अपने रेडियो को सुनते हैं।