नगर आयुक्त से मिलने पहुंची मेयर:आउटसोर्स एजेंसी के जिम्मे शहर की सफाई व्यवस्था, चयन से पहले ही विरोध शुरू;

नगर निगम निजीकरण की राह पर चल पड़ा है। शहर की सफाई व्यवस्था निगम के हवाले है। अबतक निगम खुद इसे करवाते आ रहा था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत चार साल बाद फिर सफाई व्यवस्था आउटसोर्सिंग एजेंसी के जिम्मे दी जा रही है। दैनिक मजदूरों के बजाय अब निगम आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों की भर्ती करेगा। ऐसे में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनाैती उन 1200 कर्मचारियाें काे जुटाना हाेगा, जाे अभी काम कर रहे हैं। क्याेंकि मजदूर संगठनों ने एजेंसी के साथ काम करने से साफ इनकार कर दिया है।

मजदूरों की मांग है कि पूर्व की एजेंसियाें काे मिलाकर अभी तक करीब 2 कराेड़ रुपए ईपीएफ की राशि जमा है, जिसे न एजेंसी दे रही है न निगम प्रशासन इस ओर कोई पहल कर रहा है। ऐसे में क्या गारंटी है कि नई एजेंसी तय मानक के अनुसार मजदूराें काे वेतन देगी। इसे लेकर मजदूरों ने बीते दिनों समाहरणालय के पास धरना-प्रदर्शन भी किया था। इधर, बीच का रास्ता निकालने के लिए मंगलवार काे मेयर डाॅ. बसुंधरा लाल निगम पहुंचीं, नगर आयुक्त डाॅ. याेगेश कुमार सागर काे अपने चैंबर में भी बुलाया। मगर, नगर आयुक्त अपनी व्यस्तता बताकर मिलने नहीं आए। लिहाजा यह काेशिश भी नाकाम साबित हुई।

3 अप्रैल काे स्थायी समिति की बैठक में एजेंसी की जाएगी तय

नई एजेंसी के सामने ये होगी चुनाैती
दैनिक मजदूराें के काम करने से इनकार करने पर एजेंसी बाहर से 1200 मजदूराें काे कहां से लाएगी। अगर एजेंसी इतनी बड़ी संख्या में मजदूराें काे ले भी आती है ताे उन्हें कहां रखेगी। साथ ही बाहर के मजदूरों को शहर की भाैगाेलिक स्थिति काे समझने में ही छह माह लग जाएंगे। खुद एजेंसी काे भी शहर के अलग-अलग हिस्से की स्थिति का पता लगाना हाेगा।

वर्ष 2017 से पहले एजेंसी के ही हवाले थी व्यवस्था
पूर्व मेयर डाॅ. वीणा यादव के कार्यकाल में हैदराबाद की एक एजेंसी ने सफाई का कार्य किया, वह नाले की गाद काे वजन करके उठाती थी और इसका भुगतान लेती थी। 2012 में दीपक भुवानियां मेयर बने ताे साल भर के अंदर ही एजेंसी पर ठीक से सफाई नहीं करने का आराेप लगा उससे काम छीन लिया। दाेबारा सीमांचल इलाके से दूसरी एजेंसी का चयन भुवानियां की टीम ने किया ताे 2017 में मेयर सीमा साह का कार्यकाल शुरू हुआ। इसके बाद यहां भी असंताेष सामने आया और एजेंसी से काम छीन लिया गया। फिर निगम अपने स्तर से ही सफाई करवाने लगा।

क्या है विकल्प

  • दैनिक मजदूराें के साथ निगम प्रशासन बुलाकर बात करे
  • उनकी मांग के अनुसार बकाया राशि का भुगतान करे
  • प्राेफेशनल तरीके से पारदर्शिता रखकर स्टाफ से काम ले

30 को एजेंसी की जानी थी तय, पर सरकारी अवकाश के कारण टली

नगर निगम की स्थायी समिति में 23 मार्च काे 180 तरह के एजेंडे पर चर्चा हाेनी थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण आउटसाेर्सिंग एजेंसी के चयन पर अंतिम निर्णय हाेना था, लेकिन बैठक टल गयी ताे अब यह तीन अप्रैल काे हाेगा। इससे पहले 30 मार्च काे एजेंसी तय की जानी थी पर सरकारी अवकाश के चलते यह मामला फिर टल गया। जबकि 31 मार्च काे क्लाेजिंग डे हाेने के चलते काम नहीं हाेगा और उसके अगले दिन शनिवार है। यानी तीन अप्रैल काे ही इस मामले पर बैठक कर निर्णय लिया जा सकता है।

“सफाई मजदूराें ने साेमवार काे धरना-प्रदर्शन किया था, इसे लेकर मंगलवार को नगर आयुक्त से मिलने निगम गई थी, लेकिन उनसे बात नहीं सकी। अब 3 अप्रैल काे स्थायी समिति की बैठक में इस मसले पर निर्णय लेंगे।”

– डाॅ. बसुंधरा लाल, मेयर

“मंगलवार काे हमारे कार्य का आवंटन ही हुआ है। साफ-सफाई काे लेकर अबतक क्या कार्य हुए हैं, इसकी जानकारी शाखा प्रभारियाें से लेने के बाद ही बता सकते हैं।

-विनय कुमार यादव, सिटी मैनेजर।