हिजला मेला, दुमका (Hizla Fair) – Dumka

Hizla Fair, Dumka

हिजला मेला दुमका जिला में लगने वाला एक मुख्य मेला है और यह मेला दुमका जिला में फरवरी महीने में लगता है। यह मेला फरवरी में अंतिम सप्ताह में लगता है। यह प्राचीन मेला है।

The fair was first organised in 1890 by the then Deputy Commissioner of Santhal Pargana John R Casteyrs in order to provide people and the government a common platform for interaction.

The eight-day long fair showcases stalls from various government departments and non-governmental organisation. Besides, cultural programmes, including traditional Santhali dance and drama, is always an added attraction.

Hizla Mela, Dumka

दुमका शहर से सटे हिजला पहाड़ी की तलहटी में हिजला बस्ती। दुमका सदर प्रखंड की सरुवा पंचायत का एक गांव और दुमका शहर से महज चार किलोमीटर की दूरी। इसी बस्ती में मयूराक्षी नदी तट व हिजला पहाड़ी के मध्य में है 130 साल पुराना ऐतिहासिक राजकीय जनजातीय हिजला मेला परिसर। हिजला मेला परिसर के बीच में स्थित है चांद-भैरव मुर्मू कला मंच। इस मंच की उपयोगिता हिजला मेला के दौरान सांस्कृतिक आयोजनों के लिए होती है। खेलकूद प्रतियोगिता के दौरान यह मंच अतिथियों के लिए किया जाता है। इस मंच का उपयोग मेला में अव्वल प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने के लिए होता है। साल भर हिजला के आसपास के ग्रामीण इसका उपयोग किसी न किसी रूप में करते हैं।

संताल परगना के गौरवपूर्ण सांस्कृतिक इतिहास में हिजला मेला की अपनी अलग पहचान है। क्षेत्रीय कला, रास, हर्ष, नृत्य और संगीत व सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। मेला का शुभारंभ किए जाने के बाद क्षेत्र के ग्राम प्रधान, मांझी, परगनैत के साथ ब्रिटिश हुक्मरान बैठकर विचार-विमर्श करते थे। इस कारण यहां बनने वाली नियमावली को अंग्रेजी में हिज ला कहा गया और धीरे-धीरे यह हिजला के नाम से पुकारा जाने लगा।

इस मेले में बहुत सारी दुकानें लगती है और यहां पर मुख्य तौर पर आदिवासी जनजातियों के द्वारा बहुत सारी दुकानें लगाई जाती है। उनके द्वारा बहुत सारी कलाकृतियां, पौधे, फल, फूल और भी बहुत सारी चीजें प्रदर्शित की जाती है।

आप यहां पर आ कर इंजॉय कर सकते हैं। यहां पर आपको मयूराक्षी नदी का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है, जहां पर आप घूम सकते हैं और इंजॉय कर सकते हैं। 

Hizla Fair, Dumka

यहां पर जनजातीय संग्रहालय देखने के लिए मिलता है। यहां पर आदिवासी जनजातियों के द्वारा नृत्य भी प्रस्तुत किया जाता है।

यहां पर बहुत सारे मॉडल भी प्रदर्शित किया जाते हैं। यहां पर बहुत सारे झूले लगते हैं और बहुत सारी दुकानें लगती है, जहां से आप तरह-तरह का सामान ले सकते हैं।